आधी रात घर में घुसकर वारदात करने का आरोप, आरोपी की पत्नी और दो अन्य लोगों पर पीड़ित परिवार को दबाव में लेने का दावा; पड़ोसियों के गवाही देने को तैयार होने की बात, CCTV फुटेज की जांच और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग*
आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में एक 10 वर्षीय बच्ची के साथ छेड़छाड़ का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि 30 अक्टूबर 2026 की रात करीब 12 बजे सीतानगर की जाट वाली गली में रहने वाला करीब 40 वर्षीय योगेश उनके घर पहुंचा और घर में सो रही बच्ची के साथ कथित रूप से छेड़छाड़ की। बच्ची उस समय अपनी दादी भगवान देवी के पास सो रही थी। घटना के बाद परिवार में दहशत का माहौल है। बच्ची की मां कविता देवी का आरोप है कि उन्होंने मामले को लेकर पुलिस से शिकायत की, लेकिन अब तक उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद के अनुरूप कार्रवाई नहीं हुई है।
पीड़ित कविता देवी के अनुसार, घटना के समय उनकी 10 वर्षीय बेटी घर में अपनी दादी के पास सो रही थी। आरोप है कि इसी दौरान योगेश घर में आया और बच्ची के साथ गलत हरकत की। बच्ची के विरोध और परिवार को इसकी जानकारी होने के बाद मामला सामने आया। पीड़ित पक्ष का कहना है कि आरोपी पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे भी हैं। इसके बावजूद उस पर इस तरह की हरकत करने का आरोप है। परिवार ने इस घटना को लेकर गहरी नाराजगी जताई है और आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
कविता देवी का यह भी आरोप है कि शिकायत करने के बाद आरोपी की पत्नी निर्मला और उसके मायके के दो अन्य अज्ञात लोगों ने उन पर दबाव बनाने की कोशिश की। पीड़िता का कहना है कि निर्मला उनके आरोपों को झूठा बताकर विरोध करती है और उनके साथ मारपीट तथा अभद्रता किए जाने की भी शिकायत है। आरोप है कि इस दौरान उनके बच्चों को भी परेशान किया जाता है। कविता देवी का कहना है कि उनके चार छोटे-छोटे बच्चे हैं और वह लगातार उन्हें सुरक्षित रखने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे हालात में परिवार के सामने बच्चों की सुरक्षा और न्याय पाने की दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है।
पीड़ित महिला ने पुलिस के व्यवहार को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जब वह थाने में अपनी शिकायत लेकर पहुंचीं तो उनसे पूछा गया कि घटना के समय वीडियो क्यों नहीं बनाया गया। इस पर कविता देवी का कहना है कि जब कोई व्यक्ति घर में घुसकर बच्ची के साथ गलत हरकत कर रहा हो और मां अपने बच्चों को बचाने में लगी हो, तो उस समय वीडियो बनाने के बजाय बच्चों की सुरक्षा करना पहली प्राथमिकता होती है। उनका कहना है कि चार छोटे बच्चों को संभालना और ऐसी परिस्थिति में सबूत जुटाना आसान नहीं है। इसी बात को लेकर वह बेहद परेशान हैं और चाहती हैं कि उनकी शिकायत को गंभीरता से सुना जाए।
परिवार का दावा है कि आसपास के पड़ोसी घटना और उससे जुड़े हालात के संबंध में गवाही देने के लिए तैयार हैं। पीड़ित पक्ष ने इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कराने की भी मांग की है, ताकि घटना से संबंधित साक्ष्यों का पता लगाया जा सके। परिवार का कहना है कि यदि पुलिस समय रहते सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करे तो मामले की सच्चाई सामने लाने में मदद मिल सकती है।
पीड़ित परिवार की मांग है कि बच्ची की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए शिकायत पर तत्काल निष्पक्ष जांच की जाए। साथ ही, शिकायत के बाद कथित रूप से दबाव बनाने और बच्चों को परेशान करने के आरोपों की भी जांच हो। परिवार का कहना है कि वे लगातार भय और तनाव के माहौल में जी रहे हैं। उन्हें किसी से विवाद नहीं चाहिए, बल्कि अपनी बच्ची के लिए न्याय और परिवार की सुरक्षा चाहिए। परिजनों ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर समय रहते उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है।


