*श्योपुर-मुरैना।* भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) में स्थानांतरण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब विभागीय अनियमितताओं, कथित धांधली और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाने तक पहुंच गया है। श्योपुर के वरौदा क्षेत्र में पदस्थ कर्मचारी रामस्वरूप (एटीटी) ने विभागीय अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए वर्ष 2023 से अब तक कथित रूप से चल रही अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। कर्मचारी का आरोप है कि विभाग में शिकायतें और जांच होने के बावजूद वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ रही है। परिवार लंबे समय से इस पूरे मामले को लेकर परेशान है और अब उच्च अधिकारियों से उम्मीद लगाए बैठा है कि समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई कर उन्हें न्याय दिलाया जाएगा।
कर्मचारी रामस्वरूप के अनुसार, बीएसएनएल में वर्ष 2023 से लगातार अनियमितताओं और कथित धांधली की शिकायतें सामने आ रही हैं। उनका आरोप है कि जब भी विभाग में किसी अधिकारी या जांच टीम के आने की सूचना मिलती है, तो कथित तौर पर संबंधित लोगों को पहले ही इसकी जानकारी हो जाती है। इसके बाद जांच से पहले ही अव्यवस्थाओं को दुरुस्त दिखाने की तैयारी कर ली जाती है। शिकायतकर्ता का दावा है कि जिन स्थानों पर वास्तविक अनियमितताएं होने की आशंका है, उनकी जानकारी जांच टीम तक नहीं पहुंचने दी जाती और जांच का रुख दूसरी ओर मोड़ दिया जाता है। उन्होंने जांच के लिए आने वाले अधिकारियों को कथित रूप से रिश्वत देकर वापस भेजने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनकी सच्चाई निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकती है।
रामस्वरूप का कहना है कि इस मामले में कई बार जांच कराई जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। उनका आरोप है कि बार-बार जांच होने के बावजूद वास्तविक तथ्यों को सामने लाने के बजाय मामले को लंबित रखा जा रहा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, कथित अनियमितताओं में शामिल बताए जा रहे लोगों की ओर से ऐसा रवैया अपनाया जाता है, जिससे जांच प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े होते हैं। उनका कहना है कि यदि हर बार जांच की दिशा और प्रक्रिया को प्रभावित किया जाएगा तो आखिरकार सच्चाई सामने कैसे आएगी और पीड़ित कर्मचारी को न्याय कैसे मिलेगा।
कर्मचारी ने अपने परिवार से जुड़ी जांच प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनके परिवार की भी जांच हो चुकी है और इंटरनेट पर परिवार के सदस्यों के नाम तक दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई, लेकिन आज तक उन्हें इस संबंध में कोई लिखित सूचना, जांच रिपोर्ट अथवा स्पष्ट जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया। कर्मचारी का सवाल है कि जब किसी परिवार से जुड़ी जांच की जाती है और उसके सदस्यों के नाम रिकॉर्ड में दर्ज किए जाते हैं, तो संबंधित पक्ष को जांच की जानकारी और रिपोर्ट उपलब्ध कराना भी जरूरी है, ताकि वह अपनी स्थिति स्पष्ट कर सके। बिना लिखित जानकारी के परिवार लगातार असमंजस और परेशानी में है।
रामस्वरूप ने बताया कि वर्तमान में उनका स्थानांतरण वरौदा, श्योपुर में है। वहां की परिस्थितियों को लेकर भी उन्होंने असंतोष जाहिर किया है। उनका आरोप है कि विभागीय स्तर पर कुछ लोग अपनी सुविधा और इच्छा के अनुसार जांच करवाते हैं, जबकि वास्तविक तथ्यों को सामने लाने से बचा जाता है। कर्मचारी का कहना है कि यदि जांच वास्तव में निष्पक्ष तरीके से कराई जाए और संबंधित रिकॉर्ड का मिलान किया जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। उन्होंने मांग की है कि जांच किसी ऐसे स्वतंत्र अधिकारी या टीम से कराई जाए, जिसका स्थानीय स्तर पर किसी भी संबंधित व्यक्ति से कोई प्रभाव या दबाव न हो।
इस पूरे विवाद में स्थानांतरण का मामला भी प्रमुखता से सामने आया है। कर्मचारी ने पहले महाप्रबंधक, बीएसएनएल भवन, एबी रोड मुरैना के कार्यालय में प्रार्थना-पत्र देकर स्थानांतरण में कथित भेदभाव का आरोप लगाया था। शिकायत के अनुसार, उदय सिंह चौहान, जो टीटी पद पर कार्यरत बताए गए हैं, का 25 मई 2023 को वीरपुर स्थानांतरण किया गया था। बाद में डेपुटेशन के चलते उन्हें भिण्ड वापस भेजे जाने और न्यायालय के आदेश के बाद दोबारा वीरपुर स्थानांतरण होने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद उन्हें स्थायी रूप से भिण्ड भेज दिया गया, जबकि उसके अपने स्थानांतरण के मामले में अलग मानदंड अपनाए गए।
कर्मचारी ने स्वयं को अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित बताते हुए आरोप लगाया है कि स्थानांतरण और पदस्थापना के मामले में उनके साथ जातिगत आधार पर भेदभाव किया गया। उनका कहना है कि एक ही विभाग में समान परिस्थितियों वाले कर्मचारियों के लिए अलग-अलग नियम और मानदंड अपनाना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी सेवानिवृत्ति में अब करीब 16 महीने शेष हैं। ऐसे में वह चाहते हैं कि उनके स्थानांतरण संबंधी मामले में भी विभागीय नियमों और मानवीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जाए। उनका कहना है कि नौकरी के अंतिम समय में लगातार परेशानियों का सामना करना उनके और उनके परिवार के लिए बेहद कठिन हो गया है।
शिकायतकर्ता ने बीएसएनएल के महाप्रबंधक ग्वालियर, मुख्य महाप्रबंधक भोपाल तथा एसडीएम श्योपुर सहित संबंधित उच्च अधिकारियों से पूरे मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से वर्ष 2023 से अब तक हुई सभी विभागीय जांचों का रिकॉर्ड सामने लाने, जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने, जांच के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया की समीक्षा करने तथा स्थानांतरण से संबंधित आदेशों और दस्तावेजों की निष्पक्ष पड़ताल कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर जांच को प्रभावित करने, अनियमितताओं को छिपाने अथवा पद का दुरुपयोग करने के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
कर्मचारी का कहना है कि यह मामला केवल स्थानांतरण का नहीं, बल्कि विभागीय पारदर्शिता, समान व्यवहार और न्याय के अधिकार से भी जुड़ा हुआ है। सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थान में काम करने वाले प्रत्येक कर्मचारी को समान नियमों और निष्पक्ष व्यवस्था का लाभ मिलना चाहिए। यदि किसी कर्मचारी की शिकायत लंबे समय तक अनसुनी रहती है और जांच के बावजूद उसे रिपोर्ट तक उपलब्ध नहीं कराई जाती, तो इससे विभागीय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है। इसलिए जरूरी है कि मामले को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखकर ठोस और समयबद्ध कार्रवाई की जाए।
परिवार का कहना है कि लंबे समय से चल रहे इस विवाद और लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाने के कारण वे मानसिक और पारिवारिक परेशानी का सामना कर रहे हैं। अब उनकी एक ही मांग है कि मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो, वर्ष 2023 से अब तक की पूरी जांच प्रक्रिया का रिकॉर्ड सामने आए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। परिवार चाहता है कि उनकी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए समय रहते न्याय दिलाने में मदद की जाए, ताकि उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और वर्षों से चली आ रही परेशानी का स्थायी समाधान निकल सके।
फिलहाल शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए जातिगत भेदभाव, जांच प्रभावित करने, रिश्वतखोरी और विभागीय अनियमितताओं के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित बीएसएनएल अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष भी सामने आना बाकी है। ऐसे में विभाग के उच्च अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि शिकायत में उठाए गए प्रत्येक बिंदु की निष्पक्ष जांच कराई जाए और शिकायतकर्ता को जांच की प्रगति तथा निष्कर्षों की लिखित जानकारी उपलब्ध कराई जाए। अब देखना होगा कि उच्च अधिकारी इस गंभीर शिकायत पर कब तक संज्ञान लेते हैं और कर्मचारी को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।


