नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। पूजा-पाठ, यात्रा, निवेश और अन्य शुभ कार्यों की योजना बनाने के लिए लोग तिथि, नक्षत्र, योग और शुभ मुहूर्त देखते हैं। शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह तिथि भगवान गणेश की पूजा के लिए विशेष मानी जाती है। इस दिन संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा।
मान्यता है कि भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। आइए जानते हैं 30 अक्टूबर का पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और दिन से जुड़ी प्रमुख जानकारियां।
30 अक्टूबर 2026 का पंचांग
- दिन: शुक्रवार
- मास: कार्तिक
- पक्ष: कृष्ण पक्ष
- तिथि: चतुर्थी शाम 4:52 बजे तक, इसके बाद पंचमी
- नक्षत्र: आर्द्रा रात 1:12 बजे तक
- योग: व्याघात रात 9:46 बजे तक
- करण: बव शाम 4:52 बजे तक
- सूर्योदय: सुबह 6:20 बजे
- सूर्यास्त: शाम 5:37 बजे
- चंद्रोदय: रात 9:18 बजे
- चंद्रास्त: सुबह 10:56 बजे
शुभ मुहूर्त और अशुभ काल
पंचांग में दिन के कुछ समय को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल और कुछ समय को पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार सावधानी बरतने योग्य माना जाता है।
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक
- राहुकाल: सुबह 10:44 बजे से दोपहर 12:09 बजे तक
- गुलिक काल: सुबह 8:00 बजे से 9:24 बजे तक
- यमगण्ड काल: दोपहर 2:54 बजे से शाम 4:18 बजे तक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल में नए शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचा जाता है। हालांकि, पूजा और अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए स्थानीय परंपराओं तथा पंचांग के अनुसार समय निर्धारित किया जा सकता है।
संकष्टी गणेश चतुर्थी पर पूजा का महत्व
संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित व्रत है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गणपति की पूजा करने से विघ्न-बाधाओं से मुक्ति और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार भगवान गणेश की पूजा करते हैं और चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत का पारण करते हैं। इस दिन चंद्रोदय का समय व्रत रखने वालों के लिए विशेष महत्व रखता है।
शुक्रवार को दिशाशूल किस दिशा में रहेगा?
पंचांग के अनुसार, शुक्रवार को पश्चिम दिशा में दिशाशूल बताया गया है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार, इस दिशा में यात्रा शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि यात्रा आवश्यक हो, तो लोग अपनी पारिवारिक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उपाय करते हैं।
ध्यान दें: पंचांग के समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। यहां दिए गए समय मूल समाचार में उपलब्ध विवरण पर आधारित हैं। पूजा या व्रत के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग से तिथि, चंद्रोदय और मुहूर्त की पुष्टि कर लें।


