नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में श्रीराम कथा के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद बढ़ता जा रहा है। भगवान कृष्ण की मुद्रा और उनके खड़े होने के अंदाज को ‘टेढ़ा’ बताने वाली टिप्पणी के बाद कई विपक्षी नेताओं ने शास्त्री पर निशाना साधा है। विवाद बढ़ने पर शास्त्री ने वीडियो जारी कर माफी मांगी और कहा कि उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। हालांकि, उनकी माफी के बाद भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं जारी हैं।
अखिलेश यादव बोले- ईशनिंदा के लिए माफी नहीं
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर धीरेंद्र शास्त्री के बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने लिखा कि मानवीय भूलों के लिए क्षमा किया जा सकता है, लेकिन ईशनिंदा के लिए नहीं। अखिलेश ने शास्त्री के देशभर में होने वाले कार्यक्रम रद्द करने, नए कार्यक्रमों की अनुमति नहीं देने और उनके बहिष्कार की मांग की।
उन्होंने यह भी कहा कि मामले में वैधानिक कार्रवाई होनी चाहिए। अखिलेश के मुताबिक, किसी व्यक्ति को इतना अहंकारी नहीं होना चाहिए कि वह खुद को ईश्वर से ऊपर समझने लगे।
प्रियंका चतुर्वेदी ने बताई राम-कृष्ण के स्वरूप की महत्ता
शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि संत सूरदास और गोस्वामी तुलसीदास के बीच भगवान विष्णु के अलग-अलग स्वरूपों को लेकर भक्ति भाव का संवाद था, न कि किसी एक स्वरूप को दूसरे से श्रेष्ठ बताने की कोशिश।
प्रियंका ने कहा कि भगवान कृष्ण की त्रिभंगी मुद्रा को ‘टेढ़ापन’ कहना उनके आध्यात्मिक सौंदर्य और भाव को कम करके देखने जैसा है। उन्होंने धार्मिक स्वरूपों को लेकर सनसनीखेज टिप्पणी करने से बचने की बात कही।
तेजस्वी यादव ने कहा- अब भगवान को बांटने लगे
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने भी धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर नाराजगी जताई। उन्होंने एक्स पर लिखा कि भगवान श्रीकृष्ण पर की गई टिप्पणी अशोभनीय, अक्षम्य और अमर्यादित है।
तेजस्वी ने कहा कि भगवान राम और भगवान कृष्ण एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले लोगों को बांटा जाता था और अब भगवान को बांटने की कोशिश हो रही है। तेजस्वी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेताओं से भी इस मामले में सामने आकर माफी मांगने की मांग की।
महुआ मोइत्रा और भूपेश बघेल ने भी उठाए सवाल
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भाजपा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी अन्य व्यक्ति ने भगवान कृष्ण को लेकर ऐसी टिप्पणी की होती तो भाजपा के नेता विरोध करते, लेकिन अब वे चुप क्यों हैं।
वहीं, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी शास्त्री के बयान की आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि भगवान राम और भगवान कृष्ण के बीच फर्क बताने वाली टिप्पणी पर धार्मिक संगठनों की ओर से वैसी प्रतिक्रिया क्यों नहीं आ रही, जैसी अन्य मामलों में देखने को मिलती है।
धीरेंद्र शास्त्री ने वीडियो जारी कर मांगी माफी
विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने वीडियो जारी कर हाथ जोड़कर माफी मांगी। उन्होंने कहा कि उनकी बात का गलत अर्थ निकाला गया। उनका उद्देश्य भगवान राम और भगवान कृष्ण के बीच किसी तरह का भेद पैदा करना या किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।
शास्त्री ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह बात विनोद और भक्ति भाव के संदर्भ में कही थी। उन्होंने खुद को भगवान कृष्ण का भक्त बताते हुए कहा कि यदि उनकी टिप्पणी से किसी को ठेस पहुंची है तो वे इसके लिए क्षमा मांगते हैं।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, करैरा में श्रीराम कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और भगवान कृष्ण के स्वरूप की तुलना करते हुए भगवान कृष्ण की त्रिभंगी मुद्रा, बांसुरी बजाने के अंदाज और वृंदावन का जिक्र किया था। उन्होंने भगवान कृष्ण के खड़े होने के अंदाज को ‘तीन जगह से टेढ़ा’ बताया था, जबकि भगवान राम को सीधे खड़े होने वाला बताया।
इस टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कृष्ण भक्तों और कई लोगों ने आपत्ति जताई। इसके बाद धार्मिक और राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। शास्त्री की ओर से माफी मांगे जाने के बावजूद मामला अभी भी चर्चा में है।


