मुंबई, 3 नवंबर। भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में तेजी देखने को मिली। बाजार की शुरुआत हरे निशान में हुई और शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में 1 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, कंपनियों के मजबूत दूसरी तिमाही के नतीजों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीदारी से बाजार को समर्थन मिला।
बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 75,692.78 से 595.87 अंक यानी 0.78 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,288.65 पर खुला। कारोबार के दौरान यह 728.70 अंक यानी 0.96 प्रतिशत उछलकर 76,421.48 के इंट्राडे हाई तक पहुंच गया।
वहीं, निफ्टी 50 पिछले बंद स्तर 23,440.80 के मुकाबले 141.45 अंक यानी 0.60 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,582.25 पर खुला। कारोबार के दौरान इसने 198.40 अंक यानी 0.84 प्रतिशत की तेजी के साथ 23,639.20 का इंट्राडे हाई छुआ।
फाइनेंशियल और FMCG शेयरों में खरीदारी
सेक्टोरल आधार पर वित्तीय शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज एक्स-बैंक इंडेक्स करीब 1 प्रतिशत चढ़ा। इसके अलावा केमिकल, एफएमसीजी और मीडिया शेयरों में भी मजबूती रही। इन सेक्टरों के सूचकांकों में 0.77 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई।
प्राइवेट बैंक, सीमेंट, आईटी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयर भी हरे निशान में कारोबार करते दिखे। दूसरी ओर, हेल्थकेयर और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में मुनाफावसूली के कारण दबाव देखने को मिला।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बाजार को सहारा
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियां तेजी को समर्थन दे रही हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट, बेहतर कॉर्पोरेट नतीजे और विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी को बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इसके अलावा एआई थीम आधारित वैश्विक निवेश में नरमी का असर भी बाजार की धारणा पर पड़ रहा है।
निफ्टी के लिए 23,200-23,300 का सपोर्ट
तकनीकी संकेतकों के लिहाज से भी बाजार की स्थिति मजबूत बताई जा रही है। विश्लेषकों के मुताबिक, निफ्टी ने करीब 23,170 के स्तर पर मौजूद अपने 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) को फिर से हासिल कर लिया है। इसका रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) बढ़कर 61.03 पर पहुंच गया है, जबकि पुट-कॉल रेशियो (PCR) 1.28 दर्ज किया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए 23,200 से 23,300 का स्तर निकटतम सपोर्ट जोन है, जबकि 23,600 से 23,700 का दायरा तत्काल रेजिस्टेंस के रूप में देखा जा रहा है।
FII की खरीदारी से बाजार को मिला समर्थन
विश्लेषकों का कहना है कि हालिया तेजी के पीछे वैल्यू बायिंग और शॉर्ट कवरिंग की भी अहम भूमिका है। बड़े लार्जकैप शेयरों में निवेशकों ने गिरावट के दौरान खरीदारी की थी, जिसका असर अब बाजार में दिखाई दे रहा है। वहीं, कुछ निवेशकों ने विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली की आशंका में शॉर्ट पोजीशन बनाई थीं। अब बाजार की परिस्थितियां बदलने के साथ इन पोजीशन को कवर किया जा रहा है।
सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में खरीदारी करते हुए 3,114 करोड़ रुपये की शुद्ध इक्विटी खरीद की थी। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) लगातार दूसरे दिन शुद्ध विक्रेता रहे और उन्होंने 392 करोड़ रुपये की बिकवाली की।
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजों और उनके वैश्विक भू-राजनीतिक प्रभाव पर भी रहेगी। इन घटनाक्रमों का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों और निवेश प्रवाह पर पड़ सकता है।


